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इन्क्लूजन!

इन्क्लूजन एक अहम मुद्दा है। समाज को अगर अच्छा बनाना है तो इन्क्लूजन एक सही तरीका है जिससे समाज में रह रहे हर प्राणी को सशक्त कर सकते है। हाल में ही उत्तर प्रदेश में ट्रांसजेंडर को भी मुख्य धारा में लाने की बात की गई है। जिसकी पहल पिछले साल मार्च में, राज्य विधि आयोग ने राज्य सरकार को एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें ट्रांसजेंडर लोगों को अपनी संपत्ति के अधिकार को मान्यता देने की मांग को उठाया गया। संशोधन के बाद, ट्रांसजेंडर के पास संपत्ति के उत्तराधिकार और भौतिक अधिकार होंगे। राजस्व विभाग ने कहा कि यूपी राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2020 की धारा 4 (10), 108 (2), 109 और 110 में संशोधन किए गए हैं। इस पहल को इन्क्लूजन के तौर पे देखा जा सकता है, जहां कुछ ना था, आज ट्रांसजेंडर समुदाय को भी मुख्यधारा में लाया जा रहा है।


  • इन्क्लूजन करना क्यों आवश्यक है?


2014 में एनएएलएसए(NALSA) के फैसले के अनुसार, "लिंग की द्विआधारी(binnary)धारणा भारतीय दंड संहिता में प्रतिबिंबित होती है, उदाहरण के लिए, धारा 8, 10, आदि और विवाह, गोद लेने, तलाक, विरासत, उत्तराधिकार(inheritance right) और अन्य से संबंधित कानूनों में साफ साफ नजर आती है। कल्याण कानून, 2005, इत्यादि जैसे विभिन्न विधानों में हिजड़ों / ट्रांसजेंडरों की पहचान को गैर-मान्यता देने से उन्हें कानून के समान संरक्षण से वंचित किया गया और उन्हें व्यापक स्तर पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ” इस एक प्रस्ताव से और भी कानूनों में संशोधन का रास्ता खुल जाएगा। क् क्योंकि कितनी ही स्कीम और कानून है जिनमे उनके अधिकारों का हनन होता आया है। सर्व शिक्षा अभियान, यौन उत्पीड़न कानून और अन्य प्रावधानों जैसे कि ट्रांसजेंडर लोगों को हाशिए पर ले जाने वाले अभियानों के साथ उनके बहिष्कार को दर्शाता है।द्विआधारी धारणा पुरुष / महिला के अधिकारों तक सीमित है जो गैर-बाइनरी लोगो को उनके सिटिज़न एवम् कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स से वंचित करती आ रही है। इस बदलाव से ट्रांसजेंडर लोगों को भूमि का अधिकार प्राप्त होगा और सीजेंडर(cisgender)और ट्रांसजेंडर के बीच संपत्ति के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।


एक तरीके से देखा जाए तो यह संसोधन मानसिक रूप से भी लोगो को बाइनरी धारणा से निकलने में मददगार साबित होगा। शायद इसमें समय लगे पर होगा ज़रूर। जहां नॉर्मल का डेफिनिशन में बाइनरी मानसिकता को तूल ना देकर एक इन्क्लूसिव समाज बनाने की जिम्मेदारी सब लेंगे।


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